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अच्छाई और खुशियाँ फैलाए

अच्छाई खुशियाँ फैलाना है,

इक रोते हुए को हसाना है,

चाहे लाख मुसीबतें आ जाए...

गिरकर उठकर चलना है I

गिरकर उठकर चलना है I


क्योंकि अच्छाई के रंग में ढलना है!


नाकामयाबी मिले कितनी भी बड़ी,

कामयाबी के शिखर पर चढ़ना है I

लाख बुराई आ जाए सामने...

अच्छाई के दीप जलाने है I

अच्छाई के दीप जलाने है I


क्योंकि अच्छाई के रंग में ढलना है!


किसी भूखे को भोजन खिलाना है,

किसी प्यासे को पानी पिलाना है,

किसी निराश को आशा देनी है...

किसी दरिद्र की मदद करनी है I

किसी दरिद्र की मदद करनी है I


क्योंकि अच्छाई के रंग में ढलना है!


किसी को खुश देखकर खुश होना है,

किसी दुःखी को देखकर हाथ बढ़ाना है,

इंसान को इंसानियत का पाठ पढ़ाना है...

किसी उम्मीद के बिना सिर्फ खुशियाँ फैलाना है I

किसी उम्मीद के बिना सिर्फ खुशियाँ फैलाना है I


क्योंकि अच्छाई के रंग में ढलना है! ×3


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